टूर्नामेंट खेलने जा रही कराची फुटबॉल टीम को बंदूक की नोक पर लूटा, बलूचिस्तान हाईवे पर डकैतों ने छीने पैसे-मोबाइल

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पाकिस्तान के खेल जगत से एक बेहद डराने वाली और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एक बड़ा टूर्नामेंट खेलने के लिए क्वेटा जा रही कराची की एक फुटबॉल टीम को बलूचिस्तान हाईवे पर हथियारबंद विद्रोहियों ने बंदूक की नोक पर लूट लिया।

इस खौफनाक वारदात के दौरान टीम के सभी खिलाड़ियों से नकदी, मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान छीन लिया गया। बस में खिलाड़ियों के साथ यात्रा कर रहे कुछ अन्य मुसाफिरों के साथ मारपीट की भी खबर है। इस घटना ने एक बार फिर बलूचिस्तान के इलाकों में लचर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिससे वहां भारी तनाव का माहौल है।

मस्तुंग और सरियाब के बीच हुआ हमला

यह घटना उस समय हुई जब कराची वेस्ट की फुटबॉल टीम ‘चीफ मिनिस्टर्स गोल्ड कप टूर्नामेंट’ में हिस्सा लेने के लिए क्वेटा जा रही थी। बलूचिस्तान हाईवे पर मस्तुंग और सरियाब के बीच, चेहरे पर नकाब लगाए हुए हथियारबंद लोगों के एक समूह ने बस को रोककर घेर लिया। बस में 20 खिलाड़ियों की टीम मौजूद थी।

मैनेजर ने बताई आंखों देखी

टीम के मैनेजर जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया, “हथियारबंद लोगों ने बंदूक के दम पर बस में सवार सभी लोगों को नीचे उतरने का आदेश दिया। इसके बाद उन्होंने खिलाड़ियों के मोबाइल फोन, नकदी और बाकी सारा जरूरी सामान छीन लिया। डकैतों ने विरोध करने पर कुछ यात्रियों के साथ मारपीट भी की।”

खेल मंत्री ने उठाया भत्ते का जिम्मा

लूटपाट के बाद किसी भी खिलाड़ी के पास एक भी रुपया नहीं बचा था। घटना की सूचना तुरंत बलूचिस्तान के खेल मंत्री को दी गई। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए खेल मंत्री ने तत्काल कदम उठाया और खिलाड़ियों के रोजमर्रा के खर्च और भत्ते का खुद प्रबंधन कराया, जिसकी काफी सराहना हो रही है।

सिंध फुटबॉल संघ ने टीम को ही ठहराया जिम्मेदार

इस पूरी घटना पर सिंध फुटबॉल संघ के अध्यक्ष आजम खान का बयान काफी चौंकाने वाला रहा। उन्होंने डकैतों के बजाय कराची की फुटबॉल टीम को ही लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया।

आजम खान ने कहा, “हमने सिंध की आधिकारिक टीम को इस टूर्नामेंट के लिए भेजा ही नहीं था। हमने सुरक्षा कारणों के चलते कराची सहित अन्य क्लबों को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि वे क्वेटा जाने के लिए बस या ट्रेन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। लेकिन हमारी स्पष्ट चेतावनी के बावजूद कराची वेस्ट की टीम बस से वहां गई। जिस बात का डर था, अंत में वही हुआ और उन्हें इसका नतीजा भुगतना पड़ा।”