अस्पताल जाने की जरूरत कम होगी? कार में डॉक्टर, जांच और रिपोर्ट का पूरा सिस्टम कैसे काम करता है?
इसे सिर्फ एक कार की डिक्की में रखकर किसी भी गांव या दूर-दराज के इलाके में ले जाया जा सके। ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ (Doctor on Duty) स्टार्टअप ने इस सोच को हकीकत में बदल दिया है।
करीब तीन लाख रुपये की कीमत वाली यह पोर्टेबल मशीन स्वास्थ्य सेवाओं को चारदीवारी से बाहर निकालकर सीधे मरीजों के पास पहुंचाने का एक क्रांतिकारी मॉडल पेश कर रही है।
एक बूंद खून से 75 तरह की जांच
एमडी इंटरनल मेडिसिन और ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ के फाउंडर व सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक, इस पोर्टेबल डिवाइस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक ही जगह पर प्राथमिक स्तर की दर्जनों अहम जांचें की जा सकें।
-
प्रमुख टेस्ट: इसमें ब्लड प्रेशर (BP), शुगर, बॉडी एनालिसिस, ईसीजी (ECG), और लंग्स फंक्शन (फेफड़ों की जांच) के साथ-साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा भी मौजूद है।
-
रफ्तार: मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड है। सिंगल-ड्रॉप ब्लड टेस्ट समेत कुल 75 तरह की जांच महज 10 मिनट के भीतर पूरी की जा सकती हैं।
-
पावर विकल्प: यह मशीन बिजली के अलावा सोलर पावर और बैटरी से भी संचालित होती है, जो इसे ग्रामीण इलाकों के लिए एकदम सही विकल्प बनाती है।
जांच की लागत 90% तक कम होने का दावा
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा इसकी कम लागत है। इसके डेवलपर्स का दावा है कि इस मॉडल के जरिए बड़े अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स की तुलना में जांच का खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत (यानी 90% कम) तक सीमित किया जा सकता है। इससे मरीजों के बड़े शहरों तक जाने का खर्च और इंतजार का समय दोनों बचेगा।
AI करेगा गंभीर बीमारियों की भविष्यवाणी
‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ सिर्फ एक जांच मशीन नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक पूरा हेल्थ सिस्टम है। जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर मशीन का AI मॉडल भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों (जैसे हृदय रोग या डायबिटीज के खतरे) की पहले ही भविष्यवाणी कर सकता है। इससे बीमारी के गंभीर होने से पहले ही उसका इलाज शुरू किया जा सकेगा।
अस्पतालों का दबाव घटाने और रोजगार का नया मॉडल
ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह का कहना है कि प्राथमिक स्तर की जांच स्थानीय स्तर पर होने से बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा।
इसके अलावा, यह मशीन मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार (Self-Employment) का एक नया मॉडल भी पेश कर रही है।
-
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या युवा उद्यमी 3 लाख रुपये का निवेश कर इसे खरीद सकते हैं और अपने क्षेत्र में स्थानीय जांच सेवाएं शुरू कर सकते हैं।
-
इस स्टार्टअप को उत्तर प्रदेश सरकार की ‘स्टार्ट इन यूपी’ (Start In UP) योजना के तहत 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी मिली है।
