दिल्ली फतह की तैयारी में प्रशांत किशोर की पार्टी, राजधानी में अहम बैठक
जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब अपनी पार्टी का विस्तार बिहार से बाहर करने की तैयारी में जुट गए हैं। पार्टी ने अपने राजनीतिक विस्तार के पहले पड़ाव के रूप में देश की राजधानी दिल्ली को चुना है। इसी सिलसिले में रविवार (27 सितंबर) को दिल्ली में JSP समर्थकों और कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक होने जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक में दिल्ली में पार्टी का संगठन खड़ा करने के लिए एक ‘संचालन समिति’ (Steering Committee) का ऐलान किया जा सकता है।
दिल्ली में राजनीतिक जमीन तलाशने की कवायद
प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी दिल्ली में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का लक्ष्य राजधानी में एक ठोस संगठन बनाना और आने वाले चुनावों में सीधे तौर पर मैदान में उतरना है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को होने वाली बैठक में दिल्ली के कामकाज और संगठन की रूपरेखा तय की जाएगी।
इस बैठक में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) से ताल्लुक रखने वाले JSP के कई समर्थक शामिल हो सकते हैं। यह बैठक लोक कला मंच या जनपथ स्थित वेस्टर्न कोर्ट में से किसी एक स्थान पर आयोजित किए जाने की संभावना है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, JSP दिल्ली में अपना आधिकारिक कार्यालय खोलने के लिए जगह भी तलाश रही है। कुछ स्थानों को शॉर्टलिस्ट कर लिया गया है और जल्द ही पट्टे (लीज) या किराये की औपचारिकताएं पूरी की जा सकती हैं।
बिहार से दिल्ली तक का सफर और भावी रणनीति
प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को जन सुराज पार्टी की औपचारिक स्थापना की थी। पार्टी ने पहली बार नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया और 243 में से 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, हालांकि उसे किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई।
इसके बाद प्रशांत किशोर ने खुद चुनावी राजनीति में कदम रखा और बांकीपुर विधानसभा सीट (जो भाजपा विधायक नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी) के उपचुनाव में जीत दर्ज की। अब JSP बिहार की सीमाओं से बाहर निकलकर दिल्ली की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की योजना बना रही है।
MCD से लेकर विधानसभा चुनाव तक पर नजर
JSP से जुड़े नेताओं का कहना है कि पार्टी दिल्ली में आगामी सभी बड़े चुनावों में हिस्सा लेने की रणनीति बना रही है। इनमें मुख्य रूप से 2027 का दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव, 2029 का लोकसभा चुनाव और 2030 का दिल्ली विधानसभा चुनाव शामिल है।
पार्टी से जुड़े प्रोफेसर शांतनु कुमार ने बताया कि यद्यपि दिल्ली में अभी JSP का कोई औपचारिक संगठन नहीं है, लेकिन पार्टी से जुड़े लोग लगातार जनता के बीच जा रहे हैं और प्रशांत किशोर के ‘विजन’ से उन्हें अवगत करा रहे हैं। उनका दावा है कि अब तक दिल्ली के लोगों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है।
पूर्वांचली वोटर्स और स्थानीय मुद्दों पर फोकस
दिल्ली की राजनीति में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले ‘पूर्वांचली’ मतदाताओं की भूमिका हमेशा से निर्णायक मानी जाती रही है। JSP इस बड़े और अहम वोटर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उसका फोकस केवल पूर्वांचलियों पर सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह दिल्ली के सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर चलेगी।
चुनावी मुद्दों की बात करें तो पार्टी प्रदूषण, यमुना की सफाई और स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठा सकती है। JSP नेताओं का तर्क है कि वर्तमान में इन समस्याओं से निपटने के लिए व्यवस्थाएं तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नाकाफी है। ऐसे में पार्टी दिल्ली की जनता के सामने नए और अधिक व्यावहारिक समाधान पेश करने का दावा कर रही है।
