Mamata Banerjee News: ममता बोलीं- बंगाल में फिर से हो चुनाव, ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करें
Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल में चुनाव और वोटर लिस्ट को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ममता ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने यह चुनाव पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर कराने की बात कही है। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
ममता का यह बयान चुनाव आयोग के अंदर एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद आया है।
ममता ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में गड़बड़ियां हुईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत रही। ममता ने इसे दोनों के बीच एक तरह की ‘जॉइंट वेंचर कंपनी’ तक बताया।
बंगाल चुनाव के नतीजों का भी उठाया मुद्दा
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 208 सीटें जीतीं। वहीं तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिलीं।
ममता बनर्जी ने चुनाव नतीजों को SIR से जोड़ते हुए प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि वोटर लिस्ट में हुए बदलावों का चुनाव पर असर पड़ा।
उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उनकी पार्टी के बजाय भाजपा को फायदा पहुंचाने वाली भूमिका निभाई गई।
79 लाख नाम हटाने का मुद्दा क्या है?
SIR के दौरान वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव भी विवाद का विषय बना हुआ है।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और 2026 के विधानसभा चुनाव के बीच पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 79 लाख नाम हटाए गए।
उन्होंने इसे बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर डालने वाला कदम बताया। इसी आधार पर उन्होंने उन राज्यों में भी दोबारा चुनाव कराने की मांग की है, जहां SIR के बाद चुनाव हुए और भाजपा ने जीत दर्ज की।
हालांकि, वोटर लिस्ट में नाम हटने और जुड़ने की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड और अपील की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चलती रही है। पश्चिम बंगाल के CEO कार्यालय ने SIR 2026 से जुड़े deletion lists, claims और appellate tribunal की जानकारी सार्वजनिक की है।
ममता ने आंदोलन का भी ऐलान किया
ममता बनर्जी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहेंगे, विरोध जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर आगे की रणनीति बनाएंगे। ममता ने पहले लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का भी जिक्र किया।
उनके मुताबिक अब सिर्फ महाभियोग की बात नहीं है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
ममता ने यह भी कहा कि विपक्ष ने इस मामले को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क किया था। उनका कहना है कि अब न्यायपालिका को आम लोगों की शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
दरअसल, यह पूरा विवाद चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर सामने आई आपत्तियों की एक रिपोर्ट के बाद बढ़ा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और कदमों पर आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में मतदाता सूची, नए वोटरों को जोड़ने, नाम हटाने और डेटाबेस से जुड़े मुद्दों का जिक्र है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह सवाल उठाया कि कुछ फैसले या आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग की ओर से इन रिपोर्टों पर अलग तस्वीर पेश की गई है।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग राज्यों में वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दे जरूर उठाए थे। इनमें नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े सवाल भी शामिल थे।
लेकिन आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके सभी बड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग के मुताबिक इन फैसलों में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की भी मंजूरी शामिल रही।
इससे साफ है कि फिलहाल विवाद के दो अलग पक्ष सामने हैं। एक तरफ ममता बनर्जी और विपक्षी नेताओं के आरोप हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग इन आरोपों से अलग अपना आधिकारिक पक्ष रख रहा है।
