US-Iran Conflict: ट्रंप ने दी ईरानी नेतृत्व के खात्मे की धमकी, अमेरिका ने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने को कहा
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ सीधे सैन्य टकराव की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह समझौते की मेज पर नहीं आता, तो उसे न सिर्फ गंभीर आर्थिक तबाही झेलनी पड़ेगी, बल्कि उसके शीर्ष नेतृत्व का सफाया भी कर दिया जाएगा। वहीं, ईरानी सेना ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका के किसी भी नए हमले का पहले से ज्यादा आक्रामक और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
‘नागरिक तुरंत छोड़ें ईरान’: अमेरिकी दूतावास का अलर्ट
पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए नई और सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। ईरान स्थित अमेरिकी वर्चुअल दूतावास द्वारा जारी सुरक्षा चेतावनी में सभी अमेरिकी नागरिकों को किसी भी कारण से ईरान की यात्रा न करने की हिदायत दी गई है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो अमेरिकी नागरिक पहले से ईरान में मौजूद हैं, वे बिना देरी किए तुरंत देश छोड़ दें। दूतावास ने आगाह किया है कि क्षेत्र की स्थिति बेहद अस्थिर और तनावपूर्ण है, जिसके चलते उड़ानें रद्द हो सकती हैं, एयरस्पेस बंद हो सकता है और जमीनी सीमाओं पर आवाजाही के नियम बिना किसी पूर्व सूचना के बदले जा सकते हैं।
ट्रंप की दोटूक: ‘समझौता करें या खात्मे के लिए तैयार रहें’
रॉयटर्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि ईरानी नेताओं को समय रहते समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा वे पूरी तरह से आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएंगे या फिर उनके नेतृत्व का सफाया कर दिया जाएगा।
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के न्यूयॉर्क पहुंचने की संभावना है। इस संभावित दौरे पर ट्रंप ने कहा कि वे पेजेश्कियन से सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते तेहरान शर्तों पर राजी हो।
ईरानी सेना का पलटवार: ‘मिलेगा मुंहतोड़ जवाब’
ट्रंप के बयानों के बाद ईरानी सेना ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया है। ईरानी सैन्य कमान ने साफ किया कि अगर वॉशिंगटन ने ईरान की संप्रभुता या उसके सैन्य ठिकानों पर किसी भी तरह का हमला किया, तो अमेरिकी सेना को ऐसा करारा जवाब मिलेगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी।
महीनों से जारी गतिरोध, वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव
दोनों देशों के बीच यह टकराव पिछले कई महीनों से लगातार खिंचता जा रहा है। मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत के कई दौर चलने के बावजूद दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। इस गतिरोध का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी भारी दबाव बना हुआ है।
