August 24, 2026

महंगाई से परेशान हैं तो जनसंख्या कंट्रोल करें! निरहुआ ने बताया दाम घटाने का फॉर्मूला, चीनी-प्याज की कीमतों पर दिया बयान

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पटना: चीनी और प्याज समेत रोजमर्रा की कई जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के बीच महंगाई का मुद्दा फिर गरमा गया है। इसी बीच भाजपा नेता और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ का बयान सामने आया है। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महंगाई को लेकर सवाल पूछे जाने पर निरहुआ ने कहा कि अगर महंगाई की चिंता है तो सबसे पहले जनसंख्या को नियंत्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं, जबकि उनका इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है।

‘महंगाई हमेशा से मुद्दा रही है’, निरहुआ बोले- जनसंख्या बढ़ने से बढ़ता दबाव

पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान निरहुआ से चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि महंगाई कोई नया मुद्दा नहीं है। जब से उन्हें होश है, तब से महंगाई को लेकर चर्चा सुनते आ रहे हैं। उन्होंने 1990 के दशक का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी महंगाई बढ़ने की बात कही जाती थी।

निरहुआ के मुताबिक, महंगाई बढ़ने की एक प्रमुख वजह लगातार बढ़ती जनसंख्या है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को महंगाई की इतनी चिंता है, उन्हें पहले जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क था कि देश के संसाधन सीमित हैं और उनका उपभोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसी स्थिति में वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ना कोई नई बात नहीं है।

एक हफ्ते में 50 से 70 रुपये के पार पहुंची चीनी

निरहुआ का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। जानकारी के मुताबिक, करीब एक सप्ताह के भीतर चीनी का खुदरा दाम 50 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 70 रुपये के पार पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं।

सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की है। वहीं 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता अपनी 15 दिनों की जरूरत से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेंगे। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी पर रोक लगाना है।

चीनी के दाम बढ़ने की ये बताई जा रही वजहें

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना प्रमुख वजहों में शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में चीनी की कम उपलब्धता का भी असर कीमतों पर पड़ा है।

बढ़ती कीमतों के बीच कुछ कारोबारियों पर जमाखोरी और कालाबाजारी के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे मामलों पर कार्रवाई के लिए सरकार की ओर से निगरानी और नियंत्रण के कदम उठाए जा रहे हैं।

प्याज और लहसुन ने भी बढ़ाई रसोई की चिंता

चीनी के अलावा प्याज की कीमतों में भी तेजी आई है। करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला प्याज अब 50 रुपये के पार पहुंच गया है, जबकि कुछ खुदरा बाजारों में इसकी कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जा रही है।

वहीं लहसुन की कीमत पहले से ही कई महीनों से 200 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बनी हुई है। प्याज और लहसुन के महंगे होने का असर रसोई के बजट पर पड़ रहा है और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है।

बिहार में चावल और गेहूं के दाम भी बढ़े

बिहार में पिछले तीन वर्षों से बारिश की कमी का असर कृषि उत्पादन और खाद्यान्न की कीमतों पर भी पड़ा है। बारिश की कमी के बीच चावल और गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में चीनी, प्याज और लहसुन के साथ अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।