August 24, 2026

दिल्ली में अचानक क्यों बरसी आफत जैसी बारिश? जानिए दो दिशाओं से आई हवाओं ने कैसे बदला मौसम, इस साल मानसून क्यों है अलग

delhi_rain_1787575369284_1787575

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। तेज बारिश ने उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत दी, लेकिन कुछ ही देर में कई इलाकों में जलभराव और यातायात की मुश्किलें भी बढ़ गईं। जनकपुरी में सबसे अधिक 67 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बाद छतरपुर में 57 मिमी, फरीदाबाद में 54 मिमी और गुरुग्राम में 52 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। अचानक हुई इस तेज बारिश को लेकर मौसम विभाग ने इसकी वजह बताई है। साथ ही इस बार राजधानी में मानसून का बदला हुआ मिजाज भी चर्चा में है।

दो दिशाओं से आई हवाएं और बन गई तेज बारिश की स्थिति

भारत मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत के अनुसार, सोमवार को दिल्ली में हुई तेज बारिश के पीछे अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाओं का आपस में मिलना प्रमुख कारण रहा। एक ओर उत्तर दिशा से अपेक्षाकृत सूखी उत्तरी हवाएं दिल्ली की तरफ बढ़ रही थीं, जबकि दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के आसपास बने कम दबाव वाले क्षेत्र के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी पूर्वी हवाएं उत्तर-पश्चिम की ओर पहुंच रही थीं।

दिल्ली के वातावरण में जब इन दोनों तरह की हवाओं का सामना हुआ तो वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ गई। इसी वजह से बादलों का तेजी से विकास हुआ और थोड़े समय में ही गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने लगी। यानी बारिश अचानक जरूर हुई, लेकिन इसके पीछे वातावरण में पहले से बन रही मौसमी परिस्थितियों की अहम भूमिका थी।

बंगाल की खाड़ी से आई नमी ने बढ़ाई बारिश की तीव्रता

दिल्ली में हुई इस बारिश में बंगाल की खाड़ी से पहुंची नमी का भी बड़ा योगदान रहा। पश्चिम बंगाल के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र ने नम हवाओं को उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने में मदद की। दिल्ली में पहले से गर्म और नम वातावरण मौजूद था। ऐसे में जब नमी से भरी हवाएं यहां पहुंचीं तो बादल तेजी से विकसित हुए और कई इलाकों में भारी बारिश की स्थिति बन गई।

मौसम विभाग ने दिल्ली के कई जिलों के लिए तीन घंटे का रेड अलर्ट भी जारी किया था। इसके बाद पूरे दिन के लिए ऑरेंज अलर्ट रखा गया। बारिश के दौरान बिजली गिरने के साथ करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई थी।

गर्मी और उमस के बाद अचानक इतनी तेज बारिश क्यों हुई?

दिल्ली में पिछले कुछ दिनों के दौरान बारिश के बीच लंबे अंतराल देखने को मिले थे। ऐसे समय में वातावरण में नमी बनी रहती है। इसके साथ तापमान बढ़ने पर उमस और वायुमंडलीय अस्थिरता भी बढ़ जाती है। जब ऐसी परिस्थितियों में नमी से भरी हवाओं को किसी मौसम प्रणाली का सहारा मिल जाता है तो कुछ ही समय में बादल तेजी से विकसित हो सकते हैं और तेज बारिश हो सकती है।

दिल्ली में सोमवार को भी कुछ ऐसा ही मौसम बना। लंबे समय तक गर्मी और उमस के बाद नम हवाओं के दिल्ली पहुंचने और अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाओं के मिलने से वातावरण में अस्थिरता बढ़ी। इसका असर कुछ घंटों के भीतर हुई तेज बारिश के रूप में दिखाई दिया।

इस साल दिल्ली का मानसून क्यों दिख रहा है अलग?

इस साल दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मानसून 2 जुलाई को पहुंचा था। सामान्य तौर पर राजधानी में मानसून के 27 जून तक पहुंचने की उम्मीद रहती है। इस लिहाज से इस बार मानसून करीब पांच दिन की देरी से दिल्ली पहुंचा। हालांकि मानसून आने के बाद भी बारिश का सिलसिला लगातार एक जैसा नहीं रहा।

जुलाई के पहले सप्ताह से ही दिल्ली में बारिश के बीच लंबे सूखे दौर देखने को मिले। इसके बाद अचानक कुछ घंटों में तेज बारिश हुई। यही वजह है कि इस बार राजधानी में मानसून का मिजाज सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक अस्थिर नजर आ रहा है। एक तरफ कई दिनों तक बारिश का इंतजार करना पड़ा, तो दूसरी तरफ मौसम प्रणाली सक्रिय होते ही कम समय में तेज बारिश देखने को मिली।

मौसम के बदलते पैटर्न से भी जुड़ा है बदलाव

मौसम में इस तरह के उतार-चढ़ाव को जलवायु परिवर्तन और बारिश के बदलते पैटर्न से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि किसी एक बारिश की घटना को केवल जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन लंबे समय तक बारिश का न होना और फिर कम अवधि में तेज बारिश जैसी घटनाएं बदलते मौसम के पैटर्न की ओर इशारा करती हैं।

सोमवार को दिल्ली में हुई तेज बारिश भी इसी अस्थिर मानसूनी दौर का उदाहरण रही। गर्मी और उमस, बंगाल की खाड़ी से पहुंची नमी, कम दबाव वाले क्षेत्र का प्रभाव और दो अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाओं के मिलने से राजधानी में अचानक तेज बारिश की स्थिति बनी।