ज्ञानेश कुमार…बिजली के खंभे पर लटकाकर दो फांसी… ये क्या बोल गए पप्पू यादव
CEC ज्ञानेश कुमार News: मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो नाराजगी राजनीतिक गलियारों में उठी थी, वो अब थमने का नाम ही नहीं ले रही। पहले से ही कई विपक्षी नेता उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग करते आ रहे थे, लेकिन इस बीच बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दे दिया जिसने पूरे माहौल को और गरमा दिया।
असली नाम राजेश रंजन, लेकिन जिन्हें हर कोई पप्पू यादव के नाम से जानता है, उन्होंने पटना में मीडिया के सामने खुलेआम कह दिया कि ज्ञानेश कुमार को फांसी की सजा मिलनी चाहिए और उन्हें बिजली के खंभे पर लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा, “ज्ञानेश कुमार को फांसी दी जानी चाहिए। उन्हें बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए ताकि जो लोग गरीबों, दलितों, कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों और वोटों को चुराते हैं, उन्हें सबक मिले… ज्ञानेश किसी आतंकवादी या उग्रवादी से भी बड़े आतंकवादी हैं।”
पप्पू यादव ने इसके पीछे की वजह भी बताई। उनका कहना था कि ऐसी सख्त सजा इसलिए जरूरी है ताकि गरीब, कमजोर, दलित, वंचित, ओबीसी और ईबीसी वर्गों के अधिकार और वोट चुराने वालों तक एक कड़ा संदेश पहुंचे। उन्होंने आगे कहा कि जिनके इशारे पर यानी पीएम मोदी और अमित शाह के कहने पर, इतना बड़ा अपराध हुआ है, संविधान का गला घोंटा गया है और लोकतंत्र की हत्या की गई है, उन्हें इसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए, क्योंकि ये लोग किसी आतंकवादी या उग्रवादी से भी कहीं ज्यादा खतरनाक हैं।
पप्पू यादव का आरोप – ज्ञानेश को किनका मिला समर्थन?
अब बात करें आगे की, तो पप्पू यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को RSS, प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पूरा समर्थन हासिल है। इनके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय कानून मंत्री ने भी इस मामले में उनका साथ दिया है। यही वजह है कि पप्पू यादव की मांग है कि इस पूरे मामले में तुरंत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पूरे विपक्ष से अपील की कि जब तक ज्ञानेश कुमार को उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक सारी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर आंदोलन करना चाहिए।
आखिर पूरा मामला क्या है?
अब जरा समझते हैं कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह गुस्सा अचानक क्यों भड़का। दरअसल, इसकी शुरुआत दो दिन पहले इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपी एक रिपोर्ट से हुई। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में CEC ज्ञानेश कुमार बाकी दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों को नजरअंदाज करके अपनी तरफ से एकतरफा फैसले ले रहे हैं। जबकि नियम तो यह कहता है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में फैसले सर्वानुमति से या फिर बहुमत से लिए जाने चाहिए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछले करीब 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर 14 बार असहमति जताई, लेकिन इसके बावजूद वो फैसले लागू कर दिए गए।
