Dr. Rachna Shroff: जिस बीमारी का इलाज खोजने में लगा दी जिंदगी, उसी से हारीं
डॉ. रचना श्रॉफ, जिन्होंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा पेट और आंतों के कैंसर के इलाज की खोज में लगाया, उनका 47 साल की उम्र में निधन हो गया। वह उसी बीमारी के एक एग्रेसिव फॉर्म से जूझ रही थीं, जिसे खत्म करने के लिए उन्होंने सालों रिसर्च की, और बीमारी का पता चलने के बाद उन्हें ज़्यादा वक्त नहीं मिल पाया।
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना कैंसर सेंटर की एसोसिएट डायरेक्टर
श्रॉफ यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना कैंसर सेंटर में क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशंस की एसोसिएट डायरेक्टर थीं। इस साल मई में उनकी गर्दन की एक लिम्फ नोड में सूजन आई, जिसके बाद जांच में अज्ञात मूल के कैंसर का पता चला। महीना खत्म होते-होते यह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल चुका था, और टेस्ट से संकेत मिला कि इसकी शुरुआत संभवतः पेट या आंत में हुई थी। उनकी मेडिकल टीम को पहले लगा कि यह लिम्फोमा यानी ब्लड कैंसर है, लेकिन बाद में इसकी पुष्टि टर्मिनल एडेनोकार्सिनोमा के रूप में हुई, जो शरीर के अंगों की अंदरूनी परत बनाने वाली कोशिकाओं में पनपता है।
कैंसर के बाद भी कांफ्रेंस में
डायग्नोसिस के कुछ ही दिन बाद वह कैंसर रिसर्च की एक बड़ी कॉन्फ्रेंस में पहुंचीं, ताकि हाल की क्लिनिकल कामयाबियों के बारे में जागरूकता फैलाती रहें। निधन से कुछ समय पहले एनबीसी न्यूज़ की ऐनी थॉम्पसन को ज़ूम इंटरव्यू देते हुए उन्होंने कहा था कि यह एक लंबा सफर रहा है और उन्होंने पूरी ज़िंदगी कैंसर को खत्म करने की कोशिश में लगाई, खासकर पैंक्रियाटिक कैंसर और लिवर कैंसर को।
दूसरे मरीजों को दिलाया समय, खुद नहीं हासिल कर सकीं
उनकी बीमारी का कोई इलाज नहीं था, और पति पुनीत, 17 साल की बेटी सिमरन और 13 साल के बेटे सचिन के लिए इसे स्वीकारना मुश्किल रहा, क्योंकि श्रॉफ ने खुद दूसरे मरीज़ों को ज़्यादा आप्शन और ज़्यादा वक्त दिलाने के लिए बहुत काम किया था। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना में उनके काम की बदौलत सैकड़ों क्लिनिकल ट्रायल आगे बढ़े, ऐसा कैंसर सेंटर के डायरेक्टर और उनके बॉस डॉ. डैन थियोडोरेस्कू ने थॉम्पसन को बताया। उनके मुताबिक श्रॉफ ने क्लिनिकल ट्रायल का पूरा ऑपरेशन बहुत असरदार तरीके से खड़ा किया, अपने ट्रायल चलाने और मरीज़ देखने के साथ-साथ संस्थान के लिए कई प्रतिभाशाली युवा लोगों को भी जोड़ा।
उनके नाम पर शुरु किया गया है अवार्ड
श्रॉफ का कहना था कि यही वह विरासत है जो उनके जाने के बाद भी कायम रहे, और इसे उन्होंने अपना पहला उसूल बताया था। युवा कैंसर रिसर्चर्स के लिए उनके नाम पर एक अवॉर्ड भी शुरू किया गया है, जिसके लिए दोस्तों, सहकर्मियों और समर्थकों ने अब तक 1.35 मिलियन डॉलर जुटा लिए हैं, ताकि यह सम्मान आने वाले सालों तक दिया जा सके। करियर से परे, श्रॉफ ने कहा था कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता उनके बच्चे थे और उनके लिए असल में बस यही मायने रखता है।
थॉम्पसन से बातचीत में सिमरन ने बताया कि मां की जो खूबी उन्हें सबसे ज़्यादा पसंद है वह उनकी दृढ़ता है, क्योंकि वह हर हाल में रास्ता निकाल लेती थीं और निजी तथा पेशेवर दोनों ज़िंदगी में कामयाब होना जानती थीं। सचिन ने कहा कि उन्हें मां का प्यार भरा स्वभाव सबसे ज़्यादा पसंद है।
